Abhimanyu’s Assault on Bhīṣma’s Screen; Banner-Felling and Reinforcements (सौभद्र-भीष्म-समरः)
सम्बन्ध-- अब सात्विक यज्ञ दान और तप उपादेय क्यों हैं: भगवान्से उनका क्या सम्बन्ध है तथा उन सात्विक यज्ञ, तप और दानोंगें जो अंग-वैगुण्य हो जाय, उसकी पूर्ति किस प्रकार होती है--यह सब बतलानेके लिये अगला प्रकरण आरम्भ किया जाता है-- ३० तत्सदिति निर्देशो ब्रह्मणस्त्रिविध: स्मृत: । ब्राह्मणास्तेन वेदाश्न यज्ञाश्न विहिता: पुरा,३5, तत्, सत--ऐसे यह तीन प्रकारका सच्चिदानन्दघन ब्रह्मका नाम कहा है; उसी ब्रह्मसे सृष्टिके आदिकालमें ब्राह्मण और वेद तथा यज्ञादिः रचे गये
tatsad iti nirdeśo brahmaṇas trividhaḥ smṛtaḥ | brāhmaṇās tena vedāś ca yajñāś ca vihitāḥ purā ||
‘তৎ’, ‘সৎ’—এইদৰে ব্রহ্মৰ ত্ৰিবিধ নিৰ্দেশ স্মৃত। সেই ব্রহ্মৰ পৰাই সৃষ্টিৰ আদিকালত ব্রাহ্মণ, বেদ আৰু যজ্ঞাদি কৰ্ম বিধিপূৰ্বক স্থাপিত হৈছিল।
अजुन उवाच