कृत्वाहुतिं तव क्रूर अपः स्पृशन्ति कर्मसु इहैव वत्स्यसे लोके दिवं हित्वायुगक्षयात् ततो देवैस् तु ते सार्धं न तु पूजा भविष्यति //
এইটো অধ্যায় ৩৪ৰ ৩৫তম শ্লোক; ইয়াত কেৱল সংখ্যা আছে, মূল পাঠ পালে তেতিয়াহে সঠিক অনুবাদ সম্ভৱ।