अङ्गददूतवाक्यं लङ्काप्राकारभेदनं च
Angada’s Embassy and the Breach of Laṅkā’s Ramparts
द्रौपहुुवाच अपि ते कुशलं राजन् राष्ट्र कोशे बले तथा,द्रौपदी बोली--राजन्! तुम स्वयं सकुशल हो न? तुम्हारे राज्य, खजाना और सैनिक तो कुशलसे हैं न? समृद्धिशाली शिबि, सौवीर, सिन्धु तथा अन्य जो-जो प्रदेश तुम्हारे अधिकारमें आ गये हैं, उन सबकी प्रजाका तुम धर्मपूर्वक पालन तो करते हो न?
Draupady uvāca—api te kuśalaṃ rājan rāṣṭre kośe bale tathā?
قالت دروبدي: «أيها الملك، أأنتَ بخيرٍ في نفسك؟ وهل أحوالُ مملكتك—خزانتُك وقوّتُك العسكرية—على ما يُرام؟»
वैशग्पायन उवाच