स्कन्दसेनापत्याभिषेकः
Skanda’s Consecration as Devasenāpati
तपश्चरंस्तु हुतभुक् संतप्तस्तस्य तेजसा । भृशं ग्लानश्न तेजस्वी न च किंचित् प्रजज्ञिवान्,उन्हीं दिनों अग्निदेव भी तपस्या कर रहे थे। वे तेजस्वी होकर भी अंगिराके तेजसे संतप्त हो अत्यन्त मलिन पड़ गये। परंतु इसका कारण क्या है? यह कुछ भी उनकी समझमें नहीं आया
في تلك الأيام كان إله النار أغني (هوتابهُك) يمارس التقشّف أيضًا. ومع أنه ذو بهاءٍ وتيجس، فقد ألهبه تيجس أنغيرا حتى غدا شديد الوهن كئيبًا، ولم يدرِ البتّة ما سبب ذلك.
युधिछिर उवाच