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Shloka 66

स्वर्गारोहणपर्व — तृतीयोऽध्यायः

Indra and Dharma’s Consolation; Celestial Gaṅgā Purification

ववौ देवसमीपस्थ: शीतलो5तीव भारत | कुरुकुलनन्दन राजा युधिष्ठिरने वहाँ चारों ओर जो विकृत शरीर देखे थे वे सभी अदृश्य हो गये। तदनन्तर वहाँ पावन सुगन्ध लेकर बहनेवाली पवित्र सुखदायिनी वायु चलने लगी। भारत! देवताओंके समीप बहती हुई वह वायु अत्यन्त शीतल प्रतीत होती थी

هبَّت ريحٌ بالغةُ البرودة قرب الآلهة، يا بهاراتا. وكلُّ الأجساد المشوَّهة التي كان ملكُ الكورو يودهيشثيرا قد رآها من حوله اختفت جميعًا. ثم أخذت تهبُّ هناك نسمةٌ طاهرة تحمل عطرًا مُقدَّسًا وتمنح السكينة. يا بهاراتا! لقد بدت تلك الريح التي تهبُّ بجوار الآلهة شديدةَ البرودة إلى الغاية.

ववौblew
ववौ:
TypeVerb
Rootवा (धातु)
Formलिट् (परोक्षभूत), प्रथम, एकवचन, परस्मैपद
देव-समीप-स्थःsituated near the gods
देव-समीप-स्थः:
TypeAdjective
Rootस्थ (कृदन्त-प्रातिपदिक: स्थ)
Formपुंलिङ्ग, प्रथमा, एकवचन
शीतलःcool
शीतलः:
TypeAdjective
Rootशीतल
Formपुंलिङ्ग, प्रथमा, एकवचन
अतीवvery, exceedingly
अतीव:
TypeIndeclinable
Rootअतीव
भारतO Bharata
भारत:
TypeNoun
Rootभारत
Formपुंलिङ्ग, सम्बोधन, एकवचन

वैशम्पायन उवाच