रामस्य तु सम: शस्त्रे पुरंदरसमो युधि । कार्तवीर्यसमो वीर्ये बृहस्पतिसमो मतौ,शस्त्रविद्यामें परशुरामके समान, युद्धकलामें इन्द्रके समान, बल-पराक्रममें कृतवीर्यपुत्र अर्जुनके समान, बुद्धिमें बृहस्पतिके सदृश, स्थिरता एवं धैर्यमें पर्वतके तुल्य, तेजमें अग्निके समान, गम्भीरतामें समुद्रके सदूश और क्रोधमें विषधर सर्पके समान नवयुवक अअश्वत्थामा संसारका प्रधान रथी और सुदृढ़ धनुर्धर है। उसने श्रम और थकावटको जीत लिया है। वह संग्राममें वायुके समान वेगपूर्वक विचरनेवाला तथा क्रोधमें भरे हुए यमराजके समान भयंकर है
rāmasya tu samaḥ śastre purandarasamo yudhi | kārtavīryasamo vīrye bṛhaspatisamo matau ||
قال دِهْرِتَرَاشْتْرَا: «إنَّ أَشْوَتْثَامَا يُضاهِي رَامَا (بَرَشُورَامَا) في إتقان السلاح، ويُضاهِي بُورَنْدَرَا (إِنْدْرَا) في ساحة القتال، ويُضاهِي كَارْتَفِيرْيَا في القوّة والبأس، ويُضاهِي بْرِهَسْبَتِي في الرأي والمشورة. وبهذه المقارنات يُبرز الملك تفوّق ابن دْرُونَا المهيب—تفوقًا، في المناخ الأخلاقي للحرب، يزيد رهبة العنف ويُعظّم في الوقت نفسه المسؤولية الملازمة للقوّة.»
धृतराष्ट उवाच