शिवाश्न वैश्वानरदीप्तजिदल्ना: सुभीमनादा: शतशो नदन्ती: । रक्षोगणान् नर्दतश्चापि वीक्ष्य नरेन्द्र योधा व्यथिता बभूवु:,नरेन्द्र! अग्निके समान जलती हुई जीभ और भयंकर शब्दवाली सैकड़ों गीदड़ियोंको चीत्कार करते तथा राक्षससमूहोंको गर्जते देखकर आपके सैनिक व्यथित हो उठे
يا أيها الملك! لما رأى جنودك مئات بنات آوى تعوي عواءً مروّعًا، وألسنتها تتقد كَنارِ فَيْشْفانَرا، ورأوا كذلك جموع الرّاكشَسا تزأر، اضطرب المحاربون واعتراهم الفزع.
संजय उवाच