द्रोणकर्णयोः निशि संप्रहारः — Night Engagement with Droṇa and Karṇa
त॑ प्रयान््तममोधघेषुमुत्पतद्धिरिवाशुगै: । त्वरमाणा महाराज सेनामुख्या: समाद्रवन्,महाराज! जिनके बाण कभी व्यर्थ नहीं जाते, उन अर्जुनको धनुषसे छूटे हुए बाणोंके समान उड़ते हुए-से अभश्वोंद्वारा जयद्रथकी ओर जाते देख कौरव-सेनाके प्रधान-प्रधान वीर बड़े वेगसे दौड़े
فلما رأى أبطالُ جيشِ الكورَفَةِ الكبارُ أرجونا—الذي لا تذهب سهامُه سُدى—يُسرِعُ نحو جَيَدْرَثَ كأنّه سهمٌ انفلت من القوس يطير في الفضاء، اندفعوا إليه يعدون بأقصى ما لديهم من سرعةٍ وبأسٍ، أيها الملك العظيم!
संजय उवाच