दुर्योधनस्य कर्णप्रार्थना — कृपकर्णसंवादः
Duryodhana’s Appeal to Karna — The Kripa–Karna Dialogue
विधित्सु: कलहस्यान्तं जिघांसु: कर्णमक्षिणोत् । हत्वा तस्यानुगांस्तं च हन्तुकामो महाबल:,कलहका अन्त करनेकी इच्छासे महाबली भीमसेन कर्णको मार डालना चाहते थे और इसीलिये उसे बाणोंद्वारा क्षत-विक्षत कर रहे थे। वे कर्णको मारकर उसके अनुगामी सेवकोंका भी वध करनेकी इच्छा रखते थे
رغبةً في إنهاء الخصام وقتلِ كَرْنَةَ، أخذ بهيماسينا شديدُ البأس يمزّقه بالسهام ويُثخنه جراحًا. وكان، بعد أن يصرع كَرْنَةَ، يريد كذلك أن يقتل أتباعه وخَدَمَه المرافقين له.
कर्ण उवाच