भीमसेन–कर्णयुद्धवर्णनम्
Description of the Bhīmasena–Karṇa Engagement
रुक्मपुड्खैश्न दुष्प्रेक्ष्यै: कार्मुकैः पृथिवीपते । कूजद्धिरतुलान् नादान् कोपितैस्तुरगैरिव,पृथ्वीपते! वे सोनेके पंखवाले दुर्लक्ष्य बाणों और क्रोधमें भरे हुए घोड़ोंके समान अनुपम टंकारथध्वनि करनेवाले धनुषोंके द्वारा भी समस्त दिशाओंमें दीप्ति बिखेर रहे थे
يا ملكَ الأرض! بسهامٍ ذاتِ أجنحةٍ من ذهبٍ يعسرُ إدراكُها، وبقِسيٍّ تُطلقُ طنينًا لا نظيرَ له كصهيلِ خيلٍ ثائرةٍ في الغضب، كانوا ينثرون اللمعانَ في جميعِ الجهات.
संजय उवाच