Śāṃtanu’s Ideal Rule; Devavrata’s Return; The Satyavatī Marriage Condition and Bhīṣma’s Vow (आदि पर्व, अध्याय ९४)
ययातिरुवाच यदर्हों5हं तद् यतध्व॑ं सन्त: सत्याभिनन्दिन: । अहं तन्नाभिजानामि यत् कृतं न मया पुरा,ययाति बोले--मैं जिसके योग्य हूँ, उसीके लिये यत्न करो; क्योंकि साधु पुरुष सत्यका ही अभिनन्दन करते हैं। मैंने पूर्वकालमें जो कर्म नहीं किया, उसे अब भी करनेयोग्य नहीं समझता
قال يَياطي: «أيها الصالحون، يا من تُثنون على الحقّ، اجتهدوا فيما يليق بي. فما لم أفعله من قبل، لا أراه اليوم مما ينبغي لي أن أفعله.»
अष्टक उवाच