Śāṃtanu’s Ideal Rule; Devavrata’s Return; The Satyavatī Marriage Condition and Bhīṣma’s Vow (आदि पर्व, अध्याय ९४)
अष्टक उवाच न चेदेकैकशो राजल्लोकान् नः प्रतिनन्दसि । सर्वे प्रदाय भवते गन्तारो नरकं वयम्,अष्टकने कहा--राजन! यदि आप हममेंसे एक-एकके दिये हुए लोकोंको प्रसन्नतापूर्वक ग्रहण नहीं करते तो हम सब लोग अपने पुण्यलोक आपकी सेवामें अर्पित करके नरक (भूलोक)-में जानेको तैयार हैं
قال أَشْتَكَ: «أيها الملك! إن لم تقبل بسرورٍ العوالم التي يهبها لك كلُّ واحدٍ منا على حدة، فإنا جميعًا سنهب لك عوالمَ ثوابنا كلها، ونحن مستعدون للذهاب إلى الجحيم (إلى عالم البشر).»
अष्टक उवाच