Post–Baka-vadha Residence and the Introduction of Yājñasenī’s Svayaṃvara (आदि पर्व, अध्याय १५३)
को हि मे भोक्तुकामस्य विघ्नं चरति दुर्मति: । न बिभेषि हिडिम्बे कि मत्कोपाद् विप्रमोहिता,'हिडिम्बे! मैं (भूखा हूँ और) भोजन चाहता हूँ। कौन दुर्बुद्धि मानव मेरे इस अभीष्टकी सिद्धिमें विघ्न डाल रहा है। तू अत्यन्त मोहके वशीभूत होकर क्या मेरे क्रोधसे नहीं डरती है?
«يا هيديمبا! إنني جائع وأشتهي الطعام. أيُّ أحمقٍ يعرقل تحقيق مرادي؟ أما أنتِ، وقد استولى عليكِ الوهم، أفلا تخافين غضبي؟»
वैशग्पायन उवाच