आदि पर्व, अध्याय 104 — कर्णोत्पत्ति, दानधर्म, वैकर्तन-नामकरण
Karna’s Birth, Gift-Ethic, and the Name Vaikartana
व्यवस्थानं च ते धर्मे कुलाचारं च लक्षये । प्रतिपत्तिं च कृच्छेषु शुक्रा्धिरसयोरिव,“मैं तुम्हारी धर्मनिष्ठा और कुलोचित सदाचारको भी देखती हूँ। संकटके समय शुक्राचार्य और बृहस्पतिकी भाँति तुम्हारी बुद्धि उपयुक्त कर्तव्यका निर्णय करनेमें समर्थ है
«إني أرى ثباتَك في الدَّرْمَة، وأرى فيك سُنَنَ السلوك اللائق بعادات السلالة. وفي أوقات الشدّة، يقدر عقلك على الفصل في الواجب الموافق، كَشُكْرَاتشارْيَة (Śukrācārya) وبِرِهَسْپَتِي (Bṛhaspati).»
वैशम्पायन उवाच