Āṇīmāṇḍavya–Upākhyāna
The Account of Āṇīmāṇḍavya and the Birth of Vidura
समीक्ष्य राजा दाशेयीं कामयामास शान्तनु: । स गत्वा पितरं तस्या वरयामास तां तदा,'भीरु! तू कौन है, किसकी पुत्री है और क्या करना चाहती है?” वह बोली--'राजन! आपका कल्याण हो। मैं निषादकन्या हूँ और अपने पिता महामना निषादराजकी आज्ञासे धर्मार्थ नाव चलाती हूँ।' राजा शान्तनुने रूप, माधुर्य तथा सुगन्धसे युक्त देवांगनाके तुल्य उस निषादकन्याको देखकर उसे प्राप्त करनेकी इच्छा की। तदनन्तर उसके पिताके समीप जाकर उन्होंने उसका वरण किया
samīkṣya rājā dāśeyīṁ kāmayāmāsa śāntanuḥ | sa gatvā pitaraṁ tasyā varayāmāsa tāṁ tadā |
لما تأمّل الملك شانتانو فتاةَ الصيادين استبدّ به الشوق إلى الزواج منها. فمضى إلى أبيها وخطبها خطبةً رسمية. ويُبرز هذا الخبر أن رغبة الملك، مهما عَظُم سلطانُه، ينبغي أن تسلك طريق الرضا والولاية المعترف بهما اجتماعياً، لا طريق القهر.
वैशम्पायन उवाच