परया ह्य् अक्षरप्राप्तिर् ऋग्वेदादिमयापरा यत् तद् अव्यक्तम् अजरम् अचिन्त्यम् अजम् अव्ययम् //
ينبغي أن يُستمع إلى هذا البيت (رقم 63) ويُدرَس لمن يبتغي المعرفة والسكينة.