Dhaumya’s Enumeration of Eastern Tīrthas
Prācī-diś Tīrtha-kathana
गज़जायास्त्वपरं पारं प्राप्प यः स्नाति मानव: । त्रिरात्रमुषितो राजन् सर्वपापै: प्रमुच्यते,राजन्! जो मानव गंगासागरसंगममें गंगाके दूसरे पार पहुँचकर स्नान करता है और तीन रात वहाँ निवास करता है, वह सब पापोंसे छूट जाता है
“大王啊,凡在恒河入海之汇流处到达恒河彼岸而沐浴,并在彼处住满三夜之人,皆能解脱一切罪垢。”
पुलस्त्य उवाच