Kāmyake Pāṇḍavānāṃ Bhojana-vyavasthā
Provisioning and Welfare in the Kāmyaka Forest
तर्कयन्ते सुरान् हन्तुं बलदर्पसमन्विता: । देवान् न गणयन्त्येते तथा दत्तवरा हि ते,“उनमें बल तो है ही, बली होनेका अभिमान भी है। वे देवताओंको मार डालनेका विचार करते हैं। देवताओंको तो वे लोग कुछ गिनते ही नहीं; क्योंकि उन्हें वैसा ही वरदान प्राप्त हो चुका है
“他们恃力而骄,谋划诛杀诸天。诸神在他们眼中不足挂齿,因为他们已得那般赐福。”
वैशम्पायन उवाच