Adhiratha-Rādhā Discover the Casket; Vasuṣeṇa (Karṇa) is Adopted and Formed
अग्निर॒वाच अहमन्त:शरीरस्थो भूतानां रघुनन्दन । सुसूक्ष्ममपि काकुत्स्थ मैथिली नापराध्यति,अग्निदेवने कहा--रघुनन्दन! मैं समस्त प्राणियोंके शरीरमें रहनेवाला अग्नि हूँ। मुझे मालूम है कि मिथिलेशकुमारीके द्वारा कभी सूक्ष्मसे भी सूक्ष्म अपराध नहीं हुआ है
火神阿耆尼说道:“噢,罗伽族之喜(Raghunandana)!我乃居于一切众生身内的火。噢,迦拘特斯陀(Kakutstha)!我深知那位弥提罗之女——迈提利(悉多)——从未犯下哪怕最细微的过失。”
मार्कण्डेय उवाच