Sāvitrī-Upākhyāna: Dyumatsena’s Restoration and the Return to Kāmyaka
Conclusion
तानुवाचानतान् राम: प्रगृह् सशरं धनु: । अपि मां जीवयिष्यध्वमपि व: कृतकृत्यता,उस समय श्रीरामचन्द्रजी धनुष-बाण लेकर उन प्रणाम करते हुए वानरोंसे पूछा--“क्या तुमलोग सीताका अमृतमय समाचार सुनाकर मुझे जीवनदान दोगे? क्या तुम लोगोंको अपने कार्यमें सफलता मिली है?
当时罗摩手执弓矢,对那些俯首致礼的群猴说道:“你们可曾带来关于悉多的甘露般消息,使我得以重获生机?你们的使命可已成功?”
मार्कण्डेय उवाच