Āraṇyaka-parva Adhyāya 277 — Sāvitrī-Upākhyāna: Aśvapati’s Vows and Sāvitrī’s Birth; Search for a Suitable Husband Begins
तेडन्ववर्तन् पितृन् सर्वे यशसा च बलेन च | भेत्तारो गिरिशुज्भाणां शालतालशिलायुधा:,इन्द्र आदि समस्त श्रेष्ठ देवता भी वानरों तथा रीछोंकी उत्तम स्त्रियोंसे संतान उत्पन्न करने लगे। वे सब वानर और रीछ यश तथा बलमें अपने पिता देवताओंके समान ही हुए। वे पर्वतोंक शिखर तोड़ डालनेकी शक्ति रखते थे एवं शाल (साखू) और ताल (ताड़)-के वृक्ष तथा पत्थरोंकी चट्टानें ही उनके आयुध थे
te 'nuvavartan pitṝn sarve yaśasā ca balena ca | bhettāro giriśṛṅgāṇāṁ śālatālaśilāyudhāḥ ||
马尔坎德耶说道:他们全都在名望与力量上与各自的天界父祖无异。其力足以击碎山巅,而他们的兵器乃是娑罗树、塔罗树与巨岩磐石。于是,在婆那罗与梨叉之中诞生了强盛的后裔,具足神力,以承担前方等待的正法大业。
मार्कण्डेय उवाच