पञ्चमहाभूतगुण-इन्द्रियनिग्रह-उपदेशः | Teaching on the Qualities of the Five Elements and Sense-Control
आराधयित्वा त्वां देवा: सुखमेधन्ति सर्वश: । महाद्युते! आपके रुष्ट होनेसे ही दैत्यराज देवताओंके सामने पराजित हो जाते हैं। आप इस जगतके सम्पूर्ण प्राणियोंकी सृष्टि तथा संहार करनेवाले हैं। प्रभो! आपकी आराधना करके ही सम्पूर्ण देवता सुख एवं समृद्धि-लाभ करते हैं
噢,大光辉者!诸天敬奉于你,便在四方皆得安乐与昌盛。唯你一怒,阿修罗之王便在天众面前败北。你是此世一切众生的创造者,亦是毁灭者。主宰啊!唯有礼敬于你,诸天方能获得幸福与丰饶。
उत्तडुक उवाच