Raibhya-putrayoḥ satra-vṛttāntaḥ — The Satra Episode of Raibhya’s Sons
Parāvasu and Arvāvasu
एष ते ब्रह्महा यज्ञं मा द्रष्टूं प्रविशेदिति । ब्रह्माहा प्रेक्षितेनापि पीडयेत् त्वामसंशयम्,लोमशजी कहते हैं--युधिष्ठिर! अर्वावसु मुनि भाईके लिये ब्रह्महत्याका प्रायश्ित्त पूरा करके पुनः उस यज्ञमें आये। परावसुने अपने भाईको वहाँ उपस्थित देखकर राजा बृहद्द्युम्नसे हर्षगदगद वाणीमें कहा--'राजन! यह ब्रह्महत्यारा है। अतः इसे आपका यज्ञ देखनेके लिये इस मण्डपमें प्रवेश नहीं करना चाहिये। ब्रह्मघाती मनुष्य अपनी दृष्टिमात्रसे भी आपको महान् कष्टमें डाल सकता है, इसमें संशय नहीं है”
eṣa te brahmahā yajñaṃ mā draṣṭuṃ praviśed iti | brahmahā prekṣitenāpi pīḍayet tvām asaṃśayam ||
罗摩沙说道:“此人乃杀婆罗门者;不可让他入内观看大王之祭。杀婆罗门之罪人,即便只是投来一眼,也能使大王遭受重大祸害——此事毫无疑问。”
लोगश उवाच