नारदेन गरुडात्मजानां नामकीर्तनम् | Nārada’s Enumeration of Garuḍa’s Descendants
अन्यत्र साधु गच्छाव द्रष्ठ नाहामि दानवान् । जानामि तव चात्मानं हिंसात्मकमनं तथा,“इसलिये अच्छा यही होगा कि हमलोग किसी दूसरी जगह चलें। मैं दानवोंसे साक्षात्कार भी नहीं कर सकता। मैं यह भी जानता हूँ कि आपके मनमें हिंसात्मक कार्य (युद्ध)-का अवसर उपस्थित करनेकी प्रबल इच्छा रहती है'
anyatra sādhu gacchāva draṣṭuṃ nāham iha dānavān | jānāmi tava cātmānaṃ hiṃsātmakam manaṃ tathā ||
那罗陀说道:“因此,我们最好另往他处。在这里我无法与檀那婆相见。我也知晓你的性情——你的心念偏于暴烈,总渴求一个契机去发动伤害之举,乃至掀起战争。”
नारद उवाच