अध्याय ८२ — केशवप्रयाणे निमित्तदर्शनम्
Omens and Reception During Keśava’s Departure
तच्चेद् दद्यादसंगेन सत्कृत्यानवमन्य च । प्रियं मे स्पान्महाबाहो मुच्येरन् महतो भयात्,“महाबाहो! यदि दुर्योधन लोभ छोड़कर अनादर न करके सत्कारपूर्वक हमें आधा राज्य लौटा दे तो मेरा प्रिय कार्य सम्पन्न हो जाय तथा समस्त कौरव महान् भयसे छुटकारा पा जाये
tac ced dadyād asaṅgena satkṛtyānavamanya ca | priyaṃ me syān mahābāho mucyeran mahato bhayāt ||
“大臂者啊!若难敌肯舍贪欲,不以轻慢相待,而以礼相敬,毫无执著地归还我等半壁王国,则我所珍重之事便可成就,俱卢诸人亦可脱离大恐惧。”
युधिष्ठिर उवाच