अतश्रेदवन्यथा कर्ता धार्तराष्ट्रोडनुपायवित् । अन्तं नूनं करिष्यामि क्षत्रियाणां जनार्दन,“जनार्दन! यदि समुचित उपायको न जाननेवाला धूृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन इसके विपरीत आचरण करेगा तो मैं निश्चय ही उसके पक्षमें आये हुए समस्त क्षत्रियोंका संहार कर डालूँगा'
“阎那尔达那啊!若持国之子难敌,不知权宜之道而反其道行之,则我必定诛灭一切前来助他一方的刹帝利。”
युधिष्ठिर उवाच