Udyoga-parva Adhyāya 50 — Dhṛtarāṣṭra’s Appraisal of Bhīmasena (भीमसेनभयवर्णनम्)
प्रभिन्न इव मातड्: प्रभञ्जन् पुष्पितान् द्रुमान् प्रवेक्ष्यति रणे सेनां पुत्राणां मे वृकोदर:,जैसे मदकी धारा बहानेवाला मतवाला हाथी फूले हुए वृक्षोंको तोड़ता हुआ आगे बढ़ता है, उसी प्रकार भीमसेन समरभ्ूमिमें मेरे पुत्रोंकी सेनाके भीतर प्रवेश करेगा
“腹狼者毗摩将闯入战场,直入我诸子之军,如同发情狂暴的醉象,冲折繁花盛开的树木而前行。”
धृतराष्ट उवाच