Sanatsujāta on the Imperceptible Eternal Light (यत्तच्छुक्रं महज्ज्योतिः)
एकं पाद॑ं नोत्क्षिपति सलिलाद्धंस उच्चरन् । त॑ं चेत् संततमूर्थ्वाय न मृत्युर्नामृतं भवेत् । योगिनस्तं प्रपश्यन्ति भगवन्तं सनातनम्,इस संसार-सलिलसे ऊपर उठा हुआ हंसरूप परमात्मा अपने एक पाद (जगत्)-को ऊपर नहीं उठा रहा है; यदि उसे भी वह ऊपर उठा ले तो सबका बन्ध और मोक्ष सदाके लिये मिट जाय। उस सनातन परमेश्वरका योगीजन साक्षात्कार करते हैं
ekaṃ pādaṃ notkṣipati salilād haṃsa uccaran | taṃ cet santatam ūrdhvāya na mṛtyur nāmṛtaṃ bhavet | yoginas taṃ prapaśyanti bhagavantaṃ sanātanam |
萨那苏迦多说道:“天鹅行于水上,却不将一足离开洪流;若它连那一足也尽皆永远举起,则死亡与不死皆不复存。”瑜伽行者观见那永恒之主:如天鹅般超立于轮回之水上的至上真实。
सनत्सुजात उवाच