Vidura-nīti: Atithi-dharma, Trust, Counsel-Secrecy, and Traits of Sustainable Rule
Udyoga Parva, Adhyāya 38
नष्ट समुद्रे पतितं नष्टं वाक्यमशृण्वति । अनात्मनि श्रुतं नष्टं नष्ट हुतमनग्निकम्,समुद्रमें गिरी हुई वस्तु विनाशको प्राप्त हो जाती है; जो सुनता नहीं, उससे कही हुई बात भी विनष्ट हो जाती है; अजितेन्द्रिय पुरुषका शास्त्रज्ञान और राखमें किया हुआ हवन भी नष्ट ही है
坠入大海之物,终归失落;对不肯听者所说之言,也同样消散。无自制之人所闻的经教亦成虚耗;无火而行的供祭(护摩)亦尽为徒然。
विदुर उवाच