अम्बाया रामजामदग्न्यशरणगमनम्
Ambā Seeks Refuge with Rāma Jāmadagnya
भीष्म वा शाल्वराजं वा यं वा दोषेण गच्छसि । प्रशाधि त॑ं महाबाहो यत्कृते5हं सुदुःखिता,अम्बा बोली--ब्रह्मन! मेरे मनमें भी सदा यह इच्छा बनी रहती है कि मैं युद्धमें भीष्मका वध करा दूँ। महाबाहो! आप भीष्मको या शाल्वराजको जिसे भी दोषी समझते हों, उसीको दण्ड दीजिये, जिसके कारण मैं अत्यन्त दुःखमें पड़ गयी हूँ
bhīṣmaṃ vā śālvarājaṃ vā yaṃ vā doṣeṇa gacchasi | praśādhi taṃ mahābāho yatkṛte 'haṃ suduḥkhitā ||
无论是毗湿摩,还是萨尔瓦之王——你认定谁有过失——就惩罚谁吧,臂力无双者啊;因为他,我才坠入极深的苦难之中。
अकृतव्रण उवाच