Amba approaches the Paraśurāma context; Hotravāhana’s counsel and Akṛtavraṇa’s report (अम्बोपाख्यानम्—रामदर्शनप्रसङ्गः)
प्रतिपत्स्यति राजा स पिता ते यदनन्तरम् । तत्र वत्स्यसि कल्याणि सुखं सर्वगुणान्विता,'भद्रे! घर त्यागकर संन्यासियोंके-से धर्माचरणमें संलग्न होनेकी आवश्यकता नहीं है। तुम हमारा हितकर वचन सुनो, तुम्हारा कल्याण हो। यहाँसे पिताके घरको ही चली जाओ। इसके बाद जो आवश्यक कार्य होगा, उसे तुम्हारे पिता काशिराज सोचे-समझेंगे। कल्याणि! तुम वहाँ सर्वगुणसम्पन्न होकर सुखसे रह सकोगी
pratipatsyati rājā sa pitā te yad-anantaram | tatra vatsyasi kalyāṇi sukhaṁ sarva-guṇānvitā ||
毗湿摩说道:“此后,你的父亲——国王——自会裁定当行之事。吉祥者啊,你将在那里安适而居,具足一切德行。”
भीष्म उवाच