अदारा-नीति
Crisis Composure) and ‘Jaya’ Śravaṇa (Morale-Instruction
यदैव शत्रुर्जानीयात् सपत्नं त्यक्तजीवितम् । तदैवास्मादुद्धिजते सर्पाद् वेश्मगतादिव,शत्रुको ज्यों ही यह मालूम हो जाता है कि उसका विपक्षी प्राणोंका मोह छोड़कर युद्ध करनेके लिये तैयार है, तभी घरमें रहनेवाले सर्पकी भाँति उसके भयसे वह उद्विग्न हो उठता है
“一旦敌人得知,对手已舍弃对性命的贪恋,决意备战而来,他便立刻惶惧不安,如同潜居屋中的蛇受惊而动。”
पुत्र उवाच