Udyoga-parva Adhyāya 130: Kuntī’s Instruction on Rājadharma and Daṇḍanīti
सूपस्करेण शुभ्रेण वैयाप्रेण वरूथिना । शैब्यसुग्रीवयुक्तेन प्रत्यदृश्यत दारुक:,बाहर आते ही शैब्य और सुग्रीव नामक घोड़ोंसे जुते हुए परम उज्ज्वल एवं विशाल रथके साथ सारथि दारुक दिखायी दिया। उस रथमें बहुत-सी क्षुद्रघंटिकाएँ शोभा पाती थीं। सोनेकी जालियोंसे उसकी विचित्र छटा दिखायी देती थी। वह शीघ्रगामी रथ चलते समय मेघके समान गम्भीर रव प्रकट करता था। उसके भीतर सब आवश्यक सामग्रियाँ सुन्दर ढंगसे सजाकर रखी गयी थीं। उसके ऊपर व्याप्रचर्मका आवरण लगा हुआ था और रथकी रक्षाके अन्य आवश्यक प्रबन्ध भी किये गये थे
sūpaskareṇa śubhreṇa vaiyāpreṇa varūthinā | śaibyasugrīvayuktena pratyadṛśyata dārukaḥ ||
持国王说道:“车夫达鲁迦现身了,他登上一乘华美而装备周全的战车——覆以虎皮,并具护卫之具——驾以名为舍伊比耶与苏格利婆的骏马。”
धृतराष्ट उवाच