Saṃsāra-gahana-jñāna: Vidura’s Account of Embodiment, Bondage, and Dharmic Release (संसारगहन-ज्ञानम्)
कुलीनत्वे च रमते दुष्कुलीनान् विकुत्सयन् | धनदर्पेण दृप्तश्न दरिद्रान् परिकुत्सयन्,जो लोग हीन कुलमें उत्पन्न हुए हैं, उनकी निन््दा करता हुआ कुलीन मनुष्य अपनी कुलीनतामें ही मस्त रहता है और धनी धनके घमंडसे चूर होकर दरिद्रोंके प्रति अपनी घृणा प्रकट करता है
出身高门者沉醉于自己的门第,鄙薄寒微之人;富有者又因财势而骄狂,轻蔑并羞辱贫者。
विदुर उवाच