Chapter 26: Śoka-pratiṣedha, Hata-saṅkhyā, Gati-vibhāga, Pretakārya-ājñā
Restraint of Grief, Count of the Slain, Destinies, and Funerary Directives
न येषामस्ति संस्कर्ता न च ये>त्राहिताग्नय: । वयं च कस्य कुर्याम बहुत्वात् तात कर्मणाम्,जिनका कोई संस्कार करनेवाला नहीं है तथा जो अन्निहोत्री नहीं रहे हैं, उनका भी प्रेतक्म तो करना ही होगा, तात! यहाँ तो बहुतोंके अन्त्येष्टि-कर्म करने हैं, हम किस- किसका करें?
“那些无人为之办理丧仪者,以及不再守持祭火(āhita-agni)者,也终须为其行亡者之礼,孩子啊!然而此处应行的终葬之事(antyeṣṭi)繁多无比——我们又能为谁、为多少人一一办理呢?”
युधिछिर उवाच