Treasury Security, Protection of Informants, and the Kalakavṛkṣīya Exemplum (Śānti Parva 83)
प्रमादाद्धि स्खलेद् राजा स्खलिते नास्ति जीवितम् । अन्मनिं दीप्तमिवासीदेद् राजानमुपशिक्षित:,यदि सेवकके द्वारा असावधानीके कारण कोई अपराध बन गया तो राजा पहलेके उपकारको भुलाकर कुपित हो उससे द्वेष करने लगता है और जब राजा अपनी मर्यादासे भ्रष्ट हो जाय तो उस सेवकके जीवनकी आशा नहीं रह जाती। जैसे जलती हुई आगके पास मनुष्य सचेत होकर जाता है, उसी प्रकार शिक्षित पुरुषको राजाके पास सावधानीसे रहना चाहिये
pramādād dhi skhaled rājā skhalite nāsti jīvitam | agnim dīptam ivāsīded rājānam upaśikṣitaḥ ||
毗湿摩说:“因怠忽,君王或致失足而入于过;一旦失足,依附其下者便无性命之安。故受教而谨慎之人,当近王而居,如近烈焰——步步小心,时时警觉。”
भीष्म उवाच