Āśrama-dharma: Duties of the Four Life-Stages (आश्रमधर्मः)
के धर्मा: सर्ववर्णानां चातुर्वर्ण्यस्य के पृथक् चातुर्वर्ण्याश्रमाणां च राजधर्माश्व॒ के मता:,'पितामह! कौन-से ऐसे धर्म हैं, जो सभी वर्णोके लिये उपयोगी हो सकते हैं। चारों वर्णोंके पृथक्-पृथक् धर्म कौन-से हैं? चारों वर्णोके साथ ही चारों आश्रमोंके भी धर्म कौन हैं तथा राजाके द्वारा पालन करने योग्य कौन-कौन-से धर्म माने गये हैं?
ke dharmāḥ sarvavarṇānāṃ cāturvarṇyasya ke pṛthak | cāturvarṇyāśramāṇāṃ ca rājadharmāś ca ke matāḥ ||
毗湿摩波罗衍那说道:“大祖父啊,哪些法(dharma)对一切四姓(varṇa)皆有裨益?四姓各自的本分为何?四姓并四住期(āśrama)相应之法又为何?而哪些被称为王法(rājadharma)——是君王治国时必须奉行与护持的法度?”
वैशम्पायन उवाच