मनस्–बुद्धि–गुणविचारः (Manas–Buddhi–Guṇa Inquiry) — Meditation and Nirguṇa Realization
भीष्म उवाच धर्मस्यांशप्रसूतो $सि धर्मिष्ठोईसि स्वभावत: । धर्ममूलाश्रयं वाक््यं शृणुष्वावहितो5नघ,भीष्मजीने कहा--अनघ! तुम धर्मके अंशसे उत्पन्न हुए हो और स्वभावसे ही धर्मनिष्ठ हो; अतः सावधान होकर धर्मके मूलभूत वेद और परमात्मासे सम्बन्ध रखनेवाली मेरी बात सुनो
毗湿摩曰:“无垢者(Anagha)啊!汝由法(dharma)之一分而生,天性本自笃信于法。故当专心聆听我言——此言所依者,为法之根本:吠陀(Veda),并与至上我(Paramātman)相系。”
भीष्म उवाच