Adhyāya 164: Gautama as Guest; Kaśyapa’s Satkāra and the Fourfold Arthagati; Journey to Virūpākṣa
यथातत्त्वं क्षितिपते तदिहैकमना: शृणु । पृथ्वीनाथ! अब मैं यह बता रहा हूँ कि इनकी उत्पत्ति किससे होती है? ये किस तरह स्थिर रहते हैं? और कैसे इनका विनाश होता है? राजन! सबसे पहले क्रोधकी उत्पत्तिका यथार्थरूपसे वर्णन करता हूँ। तुम यहाँ एकाग्रचित्त होकर इस विषयको सुनो
毗湿摩说道:“大王啊,请一心聆听。大地之主啊!我今将说明:它们从何而生,如何安住,又如何毁灭。首先,我将如实陈述忿怒之起源;请在此专注而听。”
भीष्म उवाच