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Shloka 3

Tapas, Tīrtha, and Moral Rehabilitation (Śānti-parva 148)

स विनिन्दंस्तथा55त्मानं पुन: पुनरुवाच ह । अविद्वास्य: सुदुर्बुद्धिः सदा निकृतिनिश्चय:,इस प्रकार बारंबार अपनी निनदा करता हुआ वह फिर बोला--'मैं बड़ा दुष्ट बुद्धिका मनुष्य हूँ, मुझपर किसीको विश्वास नहीं करना चाहिये। शठता और क्रूरता ही मेरे जीवनका सिद्धान्त बन गया है

他如此反复自责,又一再说道:“我是个心智卑劣、愚钝至极的人,谁也不该信我。欺诈与残酷,已成我一生的准则。”

भीष्म उवाच