अत्-#-#क+ चतु:षष्टितमो<5 ध्याय: दुर्योधनका संजयके सम्मुख विलाप और वाहकोंद्वारा अपने साथियोको संदेश भेजना धृतराष्ट्र रवाच अधिष्ित: पदा मूर्थ्नि भग्नसक्थो महीं गत: । शौटीर्यमानी पुत्रो मे किमभाषत संजय,धृतराष्ट्रने पूछा--संजय! जब जाँघें टूट जानेके कारण मेरा पुत्र पृथ्वीपर गिर पड़ा और भीमसेनने उसके मस्तकपर पैर रख दिया, तब उसने क्या कहा? उसे अपने बलपर बड़ा अभिमान था। राजा दुर्योधन अत्यन्त क्रोधी तथा पाण्डवोंसे वैर रखनेवाला था। उस युद्धभूमिमें जब वह बड़ी भारी विपत्तिमें फँस गया, तब क्या बोला?
dhṛtarāṣṭra uvāca |
adhiṣṭhitaḥ padā mūrdhni bhagnasaktho mahīṃ gataḥ |
śauṭīryamānī putro me kim abhāṣata sañjaya ||
持国王(德里达罗湿陀罗)说:“三阇耶啊,当我儿子双股被击碎而倒伏于地,敌人又以足踏其首时,他说了什么?他素来以武力自负。在那战场上,陷入极重灾厄之际,难敌(杜尔约陀那)说了哪些话?”
वैशम्पायन उवाच