शल्यस्य सेनापत्याभ्युपगमः | Śalya’s Acceptance of Command
भुक्ताश्न विविधा भोगास्त्रिवर्ग: सेवितो मया । पितृणां गतमानृण्यं क्षत्रधर्मस्य चोभयो:,“मैंने दूसरोंके राज्य जीते, अपने राष्ट्रका निरन्तर पालन किया, नाना प्रकारके भोग भोगे; धर्म, अर्थ और कामका सेवन किया और पितरों तथा क्षत्रियधर्म--दोनोंके ऋणसे उऋण हो गया
“我享受过种种乐事;我奉行三业(trivarga)——法(dharma)、利(artha)与欲(kāma)。我已偿清对祖先之债,也偿清对刹帝利之道之债——两者皆然。”
संजय उवाच