अध्याय ४ — दुर्योधनस्य असंधि-निश्चयः
Duryodhana’s Refusal of Reconciliation
जयद्रथो हतो राजन् कि नु शेषमुपास्महे | को हीह स पुमानस्ति यो विजेष्यति पाण्डवम्,“राजन! तुम्हारे सम्बन्धी, भाई, सहायक और मामा सब-के-सब देख रहे थे तो भी अर्जुनने उन सबको अपने पराक्रमद्वारा परास्त करके सब लोगोंके मस्तकपर पैर रखकर जयद्रथको मार डाला। अब और कौन बचा है जिसका हम भरोसा करें? यहाँ कौन ऐसा पुरुष है जो पाण्डुपुत्र अर्जुनपर विजय पायेगा?
jayadratho hato rājan ki nu śeṣam upāsmāhe | ko hīha sa pumān asti yo vijeṣyati pāṇḍavam ||
三阇耶说道:“大王啊,阇耶陀罗已被诛杀。那么我们还能依靠谁——还剩下什么可倚?此间究竟有谁、有哪一个男子,能战胜般度族的勇士(阿周那)?”
संजय उवाच