विशेषतो विकवच: श्रान्तश्षापत्समाश्रित: । भृशं विक्षतगात्रश्न श्रानन््लवाहनसैनिक:,“विशेषतः उस दशामें जिसके शरीरपर कवच नहीं हो, जो थका-माँदा, आपत्तिमें पड़ा और अत्यन्त घायल हो तथा जिसके वाहन और सैनिक भी थक गये हों, उसे युद्धके लिये विवश करना न्यायसंगत नहीं है
尤其是,那些身无甲胄、疲惫不堪、陷于危难、遍体重创,连车乘与士卒也都困乏的人,强迫其再赴战阵,实非公正。
संजय उवाच