अध्याय ३: कृपस्य दुर्योधनं प्रति नीत्युपदेशः
Kṛpa’s Counsel to Duryodhana
वणिजो नावि भिन्नायामगाधे विप्लवा इव,राजन! जैसे अगाध महासागरमें नाव फट जानेपर नौकारहित व्यापारी उस अपार समुद्रसे पार जानेकी इच्छा रखते हुए घबरा उठते हैं, उसी प्रकार किरीटधारी अर्जुनके द्वारा द्वीपस्वरूप सूतपुत्रके मारे जानेपर बाणोंसे क्षत-विक्षत हो हम सब लोग भयभीत हो गये थे
vaṇijo nāvi bhinnāyām agādhe viplavā iva, rājan!
三阇耶说道:“大王啊,正如商旅在深不可测的大海中,舟船破碎、无舟可依之时,虽仍渴望抵达彼岸,却惊惶失措;同样,当戴冠的阿周那诛杀迦尔那——那位车夫之子、曾如‘岛屿’般支撑我军之人——我们也都被恐惧攫住,身躯为箭矢所裂伤。”
संजय उवाच