पुनर्द्यूत-समाह्वानम्
Renewed Summons to the Dice-Game and Exile Wager
अशुद्धभावैरनिकृतिप्रवृत्तै- रबुध्यमान: कुरुपाण्डवाग्रय: । सम्भूय सर्वैश्व॒ जितो5पि यस्मात् पश्चादयं कैतवमभ्युपेत:,जिनके हृदयकी भावना शुद्ध नहीं है, जो सदा छल और कपटमें लगे रहते हैं, उन समस्त दुरात्माओंने मिलकर इन भोले-भाले कुरु-पाण्डव-शिरोमणि महाराज युधिष्ठिरको पहले जूएमें जीत लिया है, तत्पश्चात् ये मुझे दाँवपर लगानेके लिये विवश किये गये हैं
aśuddhabhāvair anikṛtipravṛttair abudhyamānaḥ kurupāṇḍavāgryaḥ | sambhūya sarvaiś ca jito 'pi yasmāt paścād ayaṃ kaitavam abhyupetaḥ ||
毗湿摩说道:“正因那些心怀不净、恒常沉溺于欺诈与伪诈之人合谋一处,先在掷骰之局中击败了质朴无诈、为俱卢与般度诸族之首的尤提士提罗王,随后这更进一步的骗局才又被拿出来施行。”
भीष्म उवाच