Samrāt-Lakṣaṇa and the Counsel to Check Jarāsandha (सम्राट्-लक्षणं जरासन्ध-प्रतिबाधा-परामर्शः)
अपने भाईके साथ चारुदेष्ण, चक्रदेव, सात्यकि, मैं, बलरामजी, साम्ब और प्रद्युम्न-- ये सात अतिरथी वीर हैं। राजन्! अब मुझसे दूसरोंका परिचय सुनिये। कृतवर्मा, अनाधुष्टि, समीक, समितिंजय, कंक, शंकु और कुन्ति--ये सात महारथी हैं। अन्धक भोजके दो पुत्र और बूढ़े राजा उग्रसेनको भी गिन लेनेपर उन महारथियोंकी संख्या दस हो जाती है || ५७ -:५९ || वज्रसंहनना वीरा वीर्यवन्तो महारथा: । स्मरन्तो मध्यमं देशं वृष्णिमध्ये व्यवस्थिता:,ये सभी वीर वज्रके समान सुदृढ़ शरीरवाले, पराक्रमी और महारथी हैं, जो मध्यदेशका स्मरण करते हुए वृष्णिकुलमें निवास करते हैं
vajrasaṃhananā vīrā vīryavanto mahārathāḥ | smaranto madhyamaṃ deśaṃ vṛṣṇimadhye vyavasthitāḥ ||
“这些英雄体魄坚若金刚,勇力雄健,皆为伟大车战士。怀念中土之地,他们安然立足于弗里什尼族中。”
श्रीकृष्ण उवाच