तस्यास्यतस्तानभिनिध्नतश्ष ज्याबाणहस्तस्य धनुःस्वनेन । साद्रिद्रुमा स्यात् पृथिवी विशीर्णे- त्यतीव मत्वा जनता व्यषीदत्,कर्ण बाण छोड़ता और शत्रुओंका संहार करता जा रहा था। उसके हाथमें धनुषकी प्रत्यंचा और बाण सदा मौजूद रहते थे। उसके धनुषकी टंकारसे पर्वतों और वृक्षोंसहित यह सारी पृथ्वी विदीर्ण हो जायगी, ऐसा समझकर सब लोग अत्यन्त खिन्न हो उठे थे
tasyāsyatas tān abhinighnataś ca jyā-bāṇa-hastasya dhanuḥ-svanena | sādridrumā syāt pṛthivī viśīrṇeti atīva matvā janatā vyaṣīdat ||
三阇耶说道:当他不断放箭、击倒那些敌人——手中常备弓弦与箭矢——其弓弦轰然作响,令众人心生绝望。他们以为:“这声音将把大地连同山岳与林木一并撕裂。”于是陷入深沉的沮丧。
संजय उवाच