कर्णेन युधिष्ठिरानीकविदारणम् / Karṇa’s Breach of Yudhiṣṭhira’s Battle-Line
वृषभस्य स्थितो मूर्थ्नि हयपृष्ठेच मानद । तदा स भगवान् रुद्रो निरैक्षद् दानवं पुरम्,मानद! उस समय वे वृषभके मस्तक और घोड़ेकी पीठपर खड़े थे। नरोत्तम! भगवान् रुद्रने वृषभ तथा घोड़ेकी भी पीठपर सवार हो उस दानव-नगरको देखा। तब उन्होंने वृषभके खुरोंको चीरकर उन्हें दो भागोंमें बाँठ दिया और घोड़ोंके स्तन काट डाले
vṛṣabhasya sthito mūrdhni hayapṛṣṭhe ca mānada | tadā sa bhagavān rudro niraikṣad dānavam puram ||
毗湿摩说道:“赐荣者啊,当时鲁陀罗立于公牛之首,亦踏于骏马之背,俯察达那婆之城。继而他以凶烈的降伏之举,将公牛之蹄劈为两瓣,又割去马之乳房——此乃压制魔类要塞之征象,亦显现当宇宙秩序受威胁时,神所施行的可怖而纠正的威力。”
पितामह उवाच