Mahabharata Adhyaya 183
Drona ParvaAdhyaya 18342 Versesकृष्ण के संकेत के अनुसार शत्रु-गर्जना बढ़ती है और अर्जुन की ओर की सेनाएँ/दल दसों दिशाओं में विद्रवित—क्षणिक रूप से पांडव पक्ष पर दबाव और अव्यवस्था का संकेत।

Adhyaya 183

Chapter Arc: रणभूमि के कोलाहल के बीच अर्जुन के मन में एक पुरानी जिज्ञासा उठती है—श्रीकृष्ण ने पहले जरासंध, शिशुपाल और अन्य ‘धर्मद्रोहियों’ का वध क्यों कराया, और उस नीति का युद्ध के आज के संकट से क्या संबंध है। → श्रीकृष्ण (वायुदेव-वचन के रूप में) समझाते हैं कि यदि जरासंध, शिशुपाल, नैषध आदि महाबल पूर्व में न मारे जाते, तो वे आज दुर्योधन के पक्ष में अनिवार्यतः जा मिलते और कौरव-बल को भयावह बना देते। कथा-धारा में जरासंध की उत्पत्ति (दो माताओं से आधा-आधा शरीर, ‘जरा’ द्वारा संधान) और उसकी अजेयता का वर्णन आता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि समय रहते अधर्म-शक्ति का निराकरण क्यों आवश्यक था। → रण-चित्र में गदा का अस्त्र-वेग से प्रतिहत होकर पृथ्वी को विदीर्ण करते हुए गिरना—धरती का कम्पन और पर्वतों-सा थरथराना—युद्ध की चरम हिंसा और महाबलियों की टक्कर को चरम बिंदु पर ले आता है; साथ ही कृष्ण का निर्णायक आश्वासन कि कर्ण-विषयक चिंता का ‘उपाय’ वे स्वयं बताएँगे, रणनीति को निर्णायक मोड़ देता है। → कृष्ण का निष्कर्ष स्थिर होता है: पूर्वकाल के वध केवल व्यक्तिगत शत्रुता नहीं, बल्कि भविष्य के महायुद्ध में अधर्म के संभावित संधि-बल को काटने की दूरदर्शी नीति थे; और वर्तमान में भी अर्जुन को कर्ण के विरुद्ध मार्गदर्शन मिलेगा। → कृष्ण द्वारा संकेतित ‘उपाय’ क्या है—जिससे अर्जुन कर्ण को ‘प्रसहिष्यसि’—यह रहस्य अगले प्रसंग के लिए टिका रहता है।

Shlokas

Verse 1

हि 5 बछ। हि न न एकाशीरत्याधिकशततमो< ध्याय: भगवान्‌ श्रीकृष्णका अर्जुनको जरासंध आदि धर्मद्रोहियोंके वध करनेका कारण बताना अजुन उवाच कथमस्मद्ितार्थ ते कैश्व योगैर्जनार्दन । जरासंधप्रभूतयो घातिता: पृथिवीश्व॒रा:

阿周那说道:“噢,阇那尔达那!为了我们的福祉,你以何种手段、何等谋略,使大地诸王——尤其是阇罗桑陀——被诛灭?”

Verse 2

श्रीवायुदेव उवाच जरासंधश्षेदिराजो नैषादिश्व महाबल: । यदि स्युर्न हता: पूर्वमिदानीं स्युर्भयंकरा:

圣风神(伐由天)说道:“阇罗桑陀、支提国王(尸输波罗),以及那位强大的尼沙陀之子(埃迦罗毗耶)——若非先前已被诛杀,如今必将成为极其可怖、难以抵御的强敌。”

Verse 3

दुर्योधनस्तानवश्यं वृणुयाद्‌ रथसत्तमान्‌ | तेडस्मासु नित्यविद्विष्टा: संश्रयेयुश्न कौरवान्‌

伐由说道:“都利约陀那必定会求取那些最上乘的战车勇士为援;而他们因恒常憎恨我们,必然投靠俱卢族(考罗婆)一方。”

Verse 4

ते हि वीरा महेष्वासा: कृतास्त्रा दृढयोधिन: । धार्तराष्ट्रां चमूं कृत्स्नां रक्षेयुरमरा इव

伐由说道:“那些英雄皆为强弓善射之士,武艺尽习,战志坚定。因此,他们本可如不死天众一般,护卫持国之子(达尔塔罗湿陀罗)一方的全军。”

Verse 5

सूतपुत्रो जरासंधश्वेदिराजो निषादज: । सुयोधनं समाश्रित्य जयेयु: पृथिवीमिमाम्‌

伐由说道:“车夫之子迦尔纳、阇罗桑陀、支提国王,以及尼沙陀出身的埃迦罗毗耶——若这四人同心归附苏由陀那(都利约陀那)为主,站在他一边,必定能征服这整个大地。”

Verse 6

योगैरपि हता यैस्ते तन्‍्मे शूणु धनंजय । अजय्या हि विना योगैर्म॒धे ते दैवतैरपि

风神伐由天说道:“听我说吧,陀难阇耶,他们是凭借何等权谋与计策才被击倒的。若不施用这些手段,在战场上他们实乃不可战胜——纵使诸天神祇也难以胜过他们,陀难阇耶。”

Verse 7

एकैको हि पृथक्‌ तेषां समस्तां सुरवाहिनीम्‌ । योधयेत्‌ समरे पार्थ लोकपालाभिरक्षिताम्‌

伐由说道:“昆蒂之子啊,那些英雄之中,任取其一,若单独而论,亦能在战场上独自迎战诸神全军——纵然那军势有诸方护世者(Lokapāla)守护。”

Verse 8

जरासंधो हि रुषितो रौहिणेयप्रधर्षित: । अस्मद्वधार्थ चिक्षेप गदां वै सर्वधातिनीम्‌

伐由说道:“阇罗三陀因被罗希尼之子(婆罗罗摩)在战中羞辱而怒火中烧,便为求毁灭我等,掷出他的巨槌——那确是一件令万物尽亡的凶器。”

Verse 9

सीमन्तमिव कुर्वाणा नभस: पावकप्रभा । अदृश्यतापतन्ती सा शक्रमुक्ता यथाशनि:,अग्निके समान प्रज्वलित वह गदा इन्द्रके चलाये हुए वज्गजकी भाँति आकाशमें सीमान्त- रेखा-सी बनाती हुई वहाँ गिरती दिखायी दी

它燃耀如火,穿空疾坠,仿佛在苍穹之上划出一道界线——恰似因陀罗所放的霹雳雷霆。

Verse 10

तामापततन्तीं दृष्टवैव गदां रोहिणिनन्दन: । प्रतिघातार्थमस्त्रं वै स्थूणाकर्णमवासृजत्‌

罗希尼之子婆罗罗摩一见那巨槌当空坠下,便为抵御其击,放出名为“萨图那迦耳那”(Sthūṇākarṇa)的神兵,以制其势、消其威。

Verse 11

अस्त्रवेगप्रतिहता सा गदा प्रापतद्‌ भुवि । दारयन्ती धरां देवीं कम्पयन्तीव पर्वतान्‌,उस अस्त्रके वेगसे प्रतिहत होकर वह गदा पृथ्वीदेवीको विदीर्ण करती और पर्वतोंको कँपाती हुई-सी भूतलपर गिर पड़ी

那钉锤被兵器之势所遏,遂坠落大地——裂开神圣的地母,仿佛令群山震颤。

Verse 12

तत्र सा राक्षसी घोरा जरानाम्नी सुविक्रमा | संदधे सा हि संजातं जरासंधमरिंदमम्‌

正是在钉锤坠落之处,住着一位可怖的罗刹女,名为“阇罗”(Jarā),具足卓绝的力与勇。正是她在阇罗三陀(Jarāsandha)——降伏仇敌者——出生之后,将其身躯重新缀合为一。

Verse 13

द्वाभ्यां जातो हि मातृभ्यामर्धदेह: पृथक्‌ पृथक्‌ जरया संधितो यस्माज्जरासंधस्ततो5भवत्‌,उसका आधा-आधा शरीर अलग-अलग दो माताओंके पेटसे पैदा हुआ था। जराने उसे जोड़ा था; इसीलिये उसका नाम जरासंध हुआ

他确由两位母亲所生,身躯分作两半,各自分离。因一位名为“阇罗”的老妇将两半缀合,故得名“阇罗三陀”(Jarāsandha)。

Verse 14

सा तु भूमिं गता पार्थ हता ससुतबान्धवा | गदया तेन चास्त्रेण स्थूणाकर्णेन राक्षसी,पार्थ! भूमिके भीतर रहनेवाली वह राक्षसी उस गदासे तथा स्थूणाकर्ण नामक अस्त्रके आघातसे पुत्र और बन्धु-बान्धवोंसहित मारी गयी

噢,帕尔塔!那罗刹女潜入地中,连同其子嗣与亲族,一并被钉锤与名为“斯图那迦耳那”(Sthūṇākarṇa)的兵器所击杀。

Verse 15

विनाभूत: स गदया जरासंधो महामृधे । निहतो भीमसेनेन पश्यतस्ते धनंजय,धनंजय! उस महासमरमें जरासंध बिना गदाके हो गया था; इसीलिये तुम्हारे देखते- देखते भीमसेनने उसे मार डाला

噢,檀那阇耶!在那场大决战中,阇罗三陀失去了他的钉锤;因此,就在你眼前,毗摩塞那将他击杀。

Verse 16

यदि हि स्याद्‌ गदापाणिर्जरासंध: प्रतापवान्‌ । सेन्द्रा देवा न तं हन्तुं रणे शक्ता नरोत्तम

风神伐由说道:“噢,至善之人!若那威猛的迦罗散陀果真手执战槌(伽陀),则纵使以因陀罗为首的诸天,也无力在战场上将他诛杀。”

Verse 17

त्वद्धितार्थ च नैषादिरड्गुछ्ेन वियोजित: । द्रोणेनाचार्यक॑ कृत्वा छद्मना सत्यविक्रम:,तुम्हारे हितके लिये ही द्रोणाचार्यने सत्यपराक्रमी एकलव्यका आचार्यत्व करके छलपूर्वक उसका अँगूठा कटवा दिया था

而这一切也都是为了你的利益:那尼沙陀族的少年(埃迦罗毗耶)被夺去了拇指。德罗纳名义上收他为弟子,却以诡计使那忠勇无伪的埃迦罗毗耶割下拇指——只为保全你的卓绝之名不受动摇。

Verse 18

सतु बद्धाड्गुलित्राणो नैषादिर्दूढविक्रम: । अतिमानी वनचरो बभौ राम इवापर:,सुदृढ़ पराक्रमसे सम्पन्न अत्यन्त अभिमानी एकलव्य जब हाथोंमें दस्ताने पहनकर वनमें विचरता, उस समय दूसरे परशुरामके समान जान पड़ता था

然而那位出身尼沙陀的战士——埃迦罗毗耶,勇力坚实、武艺已然证成——却戴着护指在林野间游行。其傲气凌人之时,俨然又一位罗摩(帕罗修罗摩)。

Verse 19

एकलव्यं हि साड्गुष्ठमशक्ता देवदानवा: । सराक्षसोरगा: पार्थ विजेतुं युधि करहिचित्‌

风神伐由说道:“噢,帕尔塔,昆蒂之子!若埃迦罗毗耶的拇指仍完好无损,那么纵使诸天与阿修罗同来,又有罗刹与龙蛇族(那伽)相助,也永不能在战场上击败他。”

Verse 20

किमु मानुषमात्रेण शक्‍्य: स्यात्‌ प्रतिवीक्षितुम्‌ | दृढ्मुष्टि: कृती नित्यमस्यमानो दिवानिशम्‌

区区凡人又怎能直视于他?他握力坚如磐石,技艺臻于圆满;并且昼夜不息,恒常练习放箭。

Verse 21

तुम्हारे हितके लिये मैंने ही युद्धके मुहानेपर उसे मार डाला था। पराक्रमी चेदिराज शिशुपाल तो तुम्हारी आँखोंके सामने ही मारा गया था

为着你的福祉,我亲自在战阵之口将他击倒。那位英勇的车提国王——尸输波罗——也正是在你眼前被诛杀。

Verse 22

स चाप्यशक्य: संग्रामे जेतुं सर्वसुरासुरै: । वधार्थ तस्य जातो5हमन्येषां च सुरद्विषाम्‌

风神伐由说道:“他同样不可在战场上被征服,即便诸天与阿修罗尽皆合力亦然。为诛灭他——并诛灭其他诸神之敌——我降生于世。”

Verse 23

हिडिम्बवककिर्मीरा भीमसेनेन पातिता:

风神伐由说道:“希地姆婆、婆迦与基尔弥罗,皆为毗摩塞那所诛。”

Verse 24

हतस्तथैव मायावी हैडिम्बेनाप्यलायुध:

风神伐由说道:“同样地,那使幻术的摩耶毗亦被诛——为海地姆婆所杀;阿罗由陀亦复如是。”

Verse 25

यदि होन॑ नाहनिष्यत्‌ कर्ण: शक्‍्त्या महामृथे

风神伐由说道:“若在那场大决战中,迦尔那未曾以‘沙克提’神兵将(他)诛杀……”

Verse 26

मया न निहतः: पूर्वमेष युष्मत्प्रियेप्सपा

风神伐由说道:“我先前未杀他,只因我愿行你们所喜之事。但那罗刹乃罪恶之徒——憎恨婆罗门与祭祀之礼,并竭力毁坏达摩。故而如今已使其被诛。”

Verse 27

एष हि ब्राह्मणद्वेषी यज्ञद्वेषी च राक्षस: । धर्मस्य लोप्ता पापात्मा तस्मादेष निपातित:

“此罗刹实乃憎婆罗门、憎祭祀之徒;罪恶之身,毁坏达摩者。故而将其击倒诛灭。”

Verse 28

व्यंसिता चाप्युपायेन शक्रदत्ता मयानघ । ये हि धर्मस्य लोप्तारो वध्यास्ते मम पाण्डव

风神伐由说道:“无垢的般度之子啊,我以巧妙之计,也使因陀罗所赐之神力化为徒然,并令其自迦尔那手中失落。凡败坏、毁灭达摩者,于我皆当诛杀。”

Verse 29

धर्मसंस्थापनार्थ हि प्रतिज्ैषा ममाव्यया । ब्रह्म सत्यं दम: शौचं धर्मों द्वी: श्रीर्धृति: क्षमा

风神伐由说道:“确为建立达摩,此乃我不移之誓:梵(神圣真理)、真实、克己、清净、达摩本身、坚贞、吉祥富足、坚忍之力,以及宽恕。”

Verse 30

यत्र तत्र रमे नित्यमहं सत्येन ते शपे | धर्मकी स्थापनाके लिये ही मैंने यह अटल प्रतिज्ञा कर रखी है, मैं तुमसे सत्यकी शपथ खाकर कहता हूँ, जहाँ वेद, सत्य, दम, शौच, धर्म, लज्जा, श्री, धृति और क्षमाका निवास है, वहीं मैं सदा सुखपूर्वक रहता हूँ ।।

圣风神伐由说道:“我以真理本身向你起誓:凡有吠陀、真实、克己、清净、达摩、惭愧(端庄)、吉祥富足、坚贞与宽恕之所,我常安住其中,心怀满足。故此,迦尔那啊,车夫之子(伐伊迦尔塔那),莫沉溺于忧伤。”

Verse 31

सुयोधनं चापि रणे हनिष्यति वृकोदर:

风神伐由宣告:即便苏由陀那(难敌,Duryodhana)也将于战场上被弗利拘陀罗(怖军,Bhīma)所诛。此言为战争的道德走向定下基调:傲慢与非正法(adharma)纵能逞强一时,终将走向不可避免的覆灭;而被命定为报应之执行者者,遂成为复归正义的器具。

Verse 32

तस्यापि च वधोपायं वक्ष्यामि तव पाण्डव । पाण्डुनन्दन! युद्धमें दुर्योधनका भी वध भीमसेन करेंगे। उसके वधका उपाय भी मैं तुम्हें बताऊँगा ।। वर्धते तुमुलस्त्वेष शब्द: परचमूं प्रति

伐由说道:“噢,般度之子,我也将告诉你杀他的方法。噢,般度的儿子——在战场上,毗摩塞那必将亲手诛杀难敌;我也会向你说明成就此杀的计策。此刻,一阵凶猛而喧腾的怒吼,正向敌军阵列升起。”

Verse 33

लब्धलक्ष्या हि कौरव्या विधमन्ति चमूं तव । दहत्येष च व: सैन्यं द्रोण: प्रहरतां वर:

俱卢诸将既已得中其的,箭无虚发,正碾碎你的战阵。此处又有德罗纳——诸击者之最——如烈焰焚烧你的军势,在交锋之际吞噬你的士卒。此言凸显战争阴沉的道德重压:当技艺与决意凝结为无休止的暴烈,军队的崩溃便不再只是战术上的失利,而成了关乎存亡的覆灭,迫使统帅在战场上直面自身抉择的后果。

Verse 180

इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत घटोत्कचवधपर्वमें यात्रियुद्धके समय घटोत्कचका वध होनेपर श्रीकृष्णका हर्षविषयक एक सौ अस्सीवाँ अध्याय पूरा हुआ

至此,在《圣摩诃婆罗多》中,于《德罗纳篇》之内,尤在“诛杀迦托特迦遮”一节——当行军交战之际迦托特迦遮被杀——叙述圣克里希那欢悦的第一百八十章遂告终结。此结语凸显战争中阴沉的伦理张力:即便自居正法一方,也可能因一人之死而感到宽慰或在战略上称快,只因它避免了更大的灾祸;由此可见,战场之达摩往往在于择取破坏最小的结果,而非庆贺暴力本身。

Verse 181

इति श्रीमहा भारते द्रोणपर्वणि घटोत्कचवधपर्वणि रात्रियुद्धे कृष्णवाक्ये एकाशीत्यधिकशततमो<ध्याय:

至此,在《圣摩诃婆罗多》中,于《德罗纳篇》之内,尤在“诛杀迦托特迦遮”一节——夜战之时,于名为“克里希那之言”的篇章——第一百八十一章告终。此跋语将该段落置为夜战中道德张力极重的转折点:在愈演愈烈的暴力之中,谋略与劝谏被推至前台。

Verse 226

त्वत्सहायो नरव्यात्र लोकानां हितकाम्यया । वह भी संग्राममें सम्पूर्ण देवताओं और असुरोंद्वारा जीता नहीं जा सकता था। नरव्याप्र! मैं सम्पूर्ण लोकोंके हितके लिये और शिशुपाल एवं अन्य देवद्रोहियोंका वध करनेके लिये ही तुम्हारे साथ इस जगतूमें अवतीर्ण हुआ हूँ

噢,纳罗维亚普罗!有你为助,在战场上,即便诸天与阿修罗尽出,也不能战胜我。为了一切世界的福祉,并为诛灭尸输波罗及其他叛逆诸天之徒,我才与你一同降临此世。

Verse 231

त्वद्धितार्थ तु स मया हतः संग्राममूर्थनि । चेदिराजकश्ष्‌ विक्रान्त: प्रत्यक्ष निहतस्तव

为你的安泰,我在战阵最前沿将他击杀。那勇武的支提国王已被诛灭——明明白白、当面直取——就在你眼前。

Verse 233

रावणेन समप्राणा ब्रह्म॒यज्ञविनाशना: । हिडिम्ब, वक और किर्मीर--ये रावणके समान बलवान्‌ थे और ब्राह्मणों तथा यज्ञोंका विनाश किया करते थे। इन तीनोंको भीमसेनने मार गिराया है

风神瓦由说道:“希底姆婆、婆迦与基尔弥罗——气力与罗波那等同,专以毁坏圣祭为志——他们如罗波那般强横,常使婆罗门与祭祀(yajña)遭受摧残。然而,这三人也都被毗摩塞那击倒诛杀。”

Verse 243

हैडिम्बश्नाप्युपायेन शक्‍्त्या कर्णेन घातित: । मायावी अलायुध घटोत्कचके हाथसे मारा गया है और घटोत्कचको भी मैंने ही युक्ति लगाकर कर्णकी चलायी हुई शक्तिसे मरवा दिया है

圣风神瓦由说道:“海底姆婆也因一计,被迦尔纳以‘沙克提’神枪所杀。那施幻术的阿罗由陀——即伽托特迦遮——亦由我设下机宜,使他死于迦尔纳所掷出的沙克提。”

Verse 253

मया वध्यो5भविष्यत्‌ स भैमसेनिर्घटोत्कच: । यदि महासमरमें कर्ण अपनी शक्तिद्वारा भीमसेनपुत्र घटोत्कचको नहीं मारता तो एक दिन मुझे उसका वध करना पड़ता

风神瓦由说道:“毗摩塞那之子伽托特迦遮,本应由我亲手诛杀。若在那场大决战中,迦尔纳未以其神圣之枪杀死毗摩之子伽托特迦遮,那么终有一日,诛灭他的责任便会落到我身上。”

Verse 303

उपदेक्ष्याम्युपायं ते येन तं प्रसहिष्यसि । तुम्हें वैकर्तन कर्णके विषयमें चिन्ता करनेकी आवश्यकता नहीं है। मैं तुम्हें ऐसा उपाय बताऊँगा, जिससे तुम उसका सामना कर सकोगे

风神伐由说道:“我将教你一法,使你能以强力抵御他。毋须为‘割皮者’迦尔那(Vaikartana Karṇa)忧惧;我会告诉你一个切实可行的办法,使你能够与他正面相抗。”

Verse 326

विद्रवन्ति च सैन्यानि त्वदीयानि दिशो दश । शत्रुओंकी सेनामें यह भयंकर गर्जनाका शब्द बढ़ता जा रहा है और तुम्हारे सैनिक दसों दिशाओंमें भाग रहे हैं

风神伐由说道:“你的军队已乱了阵脚,向十方溃逃。与此同时,敌军阵中那可怖的战吼愈发高涨——这是凶兆:恐惧已攫住你这一方,而对手的攻势与气势正在上升。”

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